UP Weather Update: कड़ाके की ठंड में स्कूल टाइम बदलने की मांग तेज, CM योगी से दखल की अपील
उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने आम जनजीवन के साथ-साथ स्कूली व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। सुबह-सुबह निकलने वाले बच्चे और शिक्षक सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में परिषदीय स्कूलों का समय बदलने की मांग तेज हो गई है।
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शिक्षक संगठन की मांग UP Weather Update
बच्चों की सेहत सर्वोपरि विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने मौजूदा मौसम हालात को देखते हुए स्कूल टाइमिंग में बदलाव की मांग रखी है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने इस संबंध में योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक विद्यालय संचालन का प्रस्ताव दिया है।
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उनका कहना है कि ठंड और कोहरे में बच्चों का घर से स्कूल आना-जाना मुश्किल हो रहा है। छोटे बच्चों पर इसका सीधा असर स्वास्थ्य के रूप में दिख रहा है—खांसी, जुकाम और बुखार के मामले बढ़े हैं। ऐसे में समय में थोड़ा बदलाव बच्चों के हित में होगा। कोहरा बना बड़ी वजह, शिक्षकों को भी दिक्कत एसोसिएशन के महासचिव दिलीप चौहान ने बताया कि प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह 9–10 बजे तक घना कोहरा छाया रहता है। दृश्यता इतनी कम होती है कि सड़क तक साफ दिखाई नहीं देती।
सुबह 7–8 बजे स्कूल पहुंचने वाले शिक्षक और छात्र दोनों जोखिम में रहते हैं। यही कारण है कि छात्रहित और शिक्षक-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समय परिवर्तन जरूरी हो गया है।
किन जिलों में ठंड का असर ज्यादा
कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, कानपुर नगर-देहात, अंबेडकर नगर, आगरा, इटावा, औरैया, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर सहित आसपास के इलाकों में दिन के तापमान में और गिरावट के संकेत हैं।
कानपुर में एहतियातन फैसला: दो दिन स्कूल बंद
ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए कानपुर में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 19 और 20 दिसंबर को नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी परिषदीय, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है।
मौसम का मिजाज साफ संकेत दे रहा है कि फिलहाल राहत की उम्मीद कम है। ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव या अस्थायी अवकाश जैसे फैसले सरकारी दिशा-निर्देश, छात्रों की सेहत और सुरक्षा मानकों के अनुरूप जरूरी हो जाते हैं। अब निगाहें राज्य सरकार के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं—ताकि ठंड के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई भी सुरक्षित रहे और सेहत भी।