UP Electricity Latest Update : स्मार्ट मीटर की कीमत आधी, नया कनेक्शन होगा सस्ता
स्मार्ट मीटर सस्ते होंगे, नया कनेक्शन लेना पड़ेगा कम खर्चीला उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया साल राहत लेकर आ सकता है। अगर सब कुछ तय प्रस्ताव के मुताबिक रहा, तो जनवरी से बिजली का नया कनेक्शन लेना पहले से सस्ता हो जाएगा। वजह है—स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमतों में बड़ी कटौती।
स्मार्ट मीटर की कीमत में बड़ी गिरावट
ताज़ा जानकारी के अनुसार, विद्युत नियामक आयोग जनवरी से लागू होने वाली नई कास्ट डाटा बुक (Latest Update) में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत घटाने पर विचार कर रहा है।
अभी सिंगल फेज स्मार्ट मीटर की कीमत लगभग ₹6016 है, जिसे घटाकर ₹2800 तक लाया जा सकता है। वहीं, थ्री फेज मीटर की प्रस्तावित कीमत ₹4100 रखी गई है। इससे सीधे तौर पर कनेक्शन लागत कम होगी।
कनेक्शन खर्च तय करने पर मंथन
गुरुवार को इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड रिव्यू पैनल की सब-कमेटी की बैठक हुई। इसमें बिजली कनेक्शन से जुड़ी सामग्री की दरों पर विस्तार से चर्चा की गई। अब नियामक आयोग जल्द ही इन दरों पर आधिकारिक घोषणा (Official Announcement) कर सकता है।
हालांकि, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन चाहता है कि 2019 की कास्ट डाटा बुक के मुकाबले कई सामग्री की दरों में बढ़ोतरी की जाए। इसके बावजूद, स्मार्ट मीटर की कीमत कम होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
कॉरपोरेशन बनाम उपभोक्ता परिषद
कॉरपोरेशन प्रबंधन का तर्क है कि दूसरे राज्यों—जैसे महाराष्ट्र, असम और तमिलनाडु—में स्मार्ट मीटर की कीमत ₹5200 से ₹6325 के बीच है। इसलिए यूपी में भी दरें बढ़नी चाहिए। कॉरपोरेशन के एमडी का कहना है कि मीटर की वास्तविक कीमत ₹8000 से ₹13,000 के बीच आती है।
लेकिन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मांग का विरोध किया। परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्मार्ट मीटर ₹2500 से ₹2800 में उपलब्ध हैं। उन्होंने खरीद की इनवॉइस दिखाते हुए साफ कहा कि प्रस्तावित दरें व्यावहारिक और उपभोक्ता हित में हैं।
कास्ट डाटा बुक पर उठे सवाल
परिषद ने कास्ट डाटा बुक में कई विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उदाहरण के तौर पर, 25 केवीए ट्रांसफार्मर की वास्तविक खरीद लागत करीब ₹73,101 है, जबकि प्रस्तावित दर ₹86,157 दिखाई गई है।
इसी तरह केबल, पीसीसी पोल और अन्य सामग्री की दरों में भी अंतर बताया गया।
परिषद की मांग है कि वास्तविक खरीद दरों के आधार पर ही कीमतें तय हों, ताकि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
🌾 किसानों और गरीब उपभोक्ताओं की चिंता
150 किलोवाट तक 300 मीटर की एकमुश्त कनेक्शन सुविधा को सिर्फ इलेक्ट्रिफाइड एरिया तक सीमित करने पर भी आपत्ति जताई गई। परिषद का कहना है कि इससे किसान और अविकसित कॉलोनियों के लोग वंचित हो जाएंगे।
इसके अलावा, 40 मीटर के बाद दो कनेक्शन की सुविधा खत्म होने से गरीब उपभोक्ताओं का खर्च और बढ़ेगा।
👩👩👧 महिलाओं के लिए छूट की मांग
परिषद ने सरकार से सरकारी लाभ (Government Benefits) के तहत महिलाओं को विशेष राहत देने की मांग भी रखी।
प्रस्ताव है कि:
ग्रामीण महिलाओं को नए कनेक्शन पर 33% छूट
शहरी महिलाओं को 15% छूट दी जाए
साथ ही, घरेलू उपभोक्ताओं (5 किलोवाट तक) की सिक्योरिटी और प्रोसेसिंग फीस बढ़ाने को भी अनुचित बताया गया।
🔄 प्रीपेड और पोस्टपेड—दोनों विकल्प जरूरी
एक अहम सुझाव यह भी दिया गया कि कास्ट डाटा बुक में प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प शामिल किए जाएं, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुन सकें।
📝 बैठक में कौन-कौन रहा शामिल
इस अहम बैठक में पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल, मध्यांचल डिस्कॉम की एमडी रिया केजरीवाल, विभिन्न डिस्कॉम के निदेशक, टोरेंट पावर और नोएडा पावर कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
अगर प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगती है, तो उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को कम खर्च में नया कनेक्शन, सस्ते स्मार्ट मीटर और ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं। अब सभी की नजरें नियामक आयोग के फाइनल फैसले पर टिकी हैं, जो लाखों उपभोक्ताओं के बिजली बिल और कनेक्शन खर्च को सीधे प्रभावित करेगा।