TET अनिवार्यता पर उतरे शिक्षक,रोते हुए गुहार, ग्राउंड रिपोर्ट में जाने वजह

TET अनिवार्यता पर उतरे शिक्षक,रोते हुए गुहार, ग्राउंड रिपोर्ट में जाने वजह

रामलीला मैदान में शिक्षकों का महाप्रदर्शन, टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देशभर से जुटे लाखों टीचर

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से आए लाखों शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन सितंबर 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है, जिसमें सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है—चाहे उनकी नियुक्ति 2011 से पहले ही क्यों न हुई हो।

📌 क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सभी शिक्षकों को 2 साल के भीतर टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। यह आदेश रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट (पूर्व प्रभाव) के साथ लागू किया गया है, यानी पहले से कार्यरत शिक्षकों पर भी यह नियम लागू होगा।

🧑‍🏫 शिक्षकों का क्या कहना है?

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव संजय शर्मा ने कहा कि:

2011 में टीईटी लागू हुई थी, उससे पहले नियुक्त शिक्षकों ने उस समय की तय योग्यताओं के आधार पर नौकरी पाई थी
अब 25-30 साल सेवा दे चुके शिक्षकों से दोबारा परीक्षा लेना अन्यायपूर्ण है
25 लाख शिक्षक और करीब 1 करोड़ परिवार इस फैसले से प्रभावित होंगे

उन्होंने इसे “जीवन और रोजगार बचाने की लड़ाई” बताया।

🏛️ संगठन की मुख्य मांगें

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा के अनुसार:

टीईटी को पूरी तरह खत्म करने की मांग नहीं है
लेकिन 2010/2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे लागू न किया जाए
सरकार इस पर ऑर्डिनेंस या नया कानून लाकर समाधान करे
⚖️ शिक्षकों की प्रमुख दलीलें
कोई भी नया नियम पुराने कर्मचारियों पर लागू नहीं होता
नियुक्ति के समय तय योग्यता पूरी करने के बाद ही नौकरी मिली थी
अगर कहीं भर्ती घोटाले हुए हैं, तो उनकी जांच हो—not सभी शिक्षकों को दोबारा परीक्षा दी जाए
📣 मैदान में दिखा भारी जनसैलाब

रामलीला मैदान में “No TET Before RTE Act” और “Justice for Teachers” जैसे नारे लिखे पोस्टर और बैनर दिखाई दिए।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक के शिक्षक इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

🎤 सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश

शिक्षकों का कहना है कि यह प्रदर्शन दबाव बनाने के लिए नहीं बल्कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए है।
हालांकि, संख्या बल को देखते हुए यह सरकार पर एक बड़ा राजनीतिक दबाव भी माना जा रहा है।

🗣️ आगे की रणनीति क्या?

शिक्षकों ने साफ कहा:

“हम लड़ेंगे और जीतेंगे… जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।”

 

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