शिक्षामित्र ऊषा ओझा की साठ वर्ष में सेवा समाप्ति पर रोक
👉 *मामला रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन : विजय पाण्डेय*
लखनऊ। जनपद सुलतानपुर की शिक्षामित्र उषा ओझा द्वारा साठ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवा समाप्त किए जाने के विरुद्ध अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय के माध्यम से दायर याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद, लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति प्रकाश सिंह ने निर्देश दिया है कि याचिनी के विरुद्ध किसी भी प्रकार की कार्रवाई रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
श्रीमती उषा ओझा वर्ष 2006 से प्राथमिक विद्यालय विभारपुर, विकास खंड–जयसिंहपुर में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं।
उनकी सेवानिवृत्ति 23 नवंबर 2025 को प्रस्तावित थी, क्योंकि उसी दिन वे 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर रही थीं। उन्होंने 17 फरवरी 2023 के उस शासनादेश को चुनौती दी है, जिसमें शिक्षामित्रों की सेवा समाप्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित की गई है। उनका कहना है कि जब नियमित सहायक अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है और शिक्षामित्र भी समान कार्य व दायित्व निभाते हैं, तो 60 वर्ष की आयु में सेवा समाप्ति समानता के सिद्धांतों के विपरीत है। याचिका में इस संबंध में पूर्व के उच्च न्यायालयीन निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है।
माननीय न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए विद्यालय ने श्रीमती उषा ओझा को पुनः सेवा ग्रहण करा दी है और वे पूर्ववत शिक्षण कार्य में सक्रिय रूप से संलग्न हो गई हैं। कोर्ट के इस संरक्षण ने न केवल याचिनी को राहत दी है, बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों में भी न्याय की नई आशा उत्पन्न की है।




