प्राइवेट स्कूलों में भी लागू हो TET परीक्षा, सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका

प्राइवेट स्कूलों में भी लागू हो TET परीक्षा, सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका

टीईटी परीक्षा पर नई बहस

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक नई याचिका में यह मांग की गई है कि Teacher Eligibility Test (TET) को सरकारी ही नहीं, बल्कि सभी निजी और अल्पसंख्यक स्कूलों में भी अनिवार्य किया जाए। याचिका में कहा गया है कि टीईटी परीक्षा शिक्षा के अधिकार का अहम हिस्सा है क्योंकि इससे योग्य और सक्षम शिक्षकों का चयन सुनिश्चित होता है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अल्पसंख्यक स्कूलों को टीईटी से छूट देना बच्चों के मौलिक शिक्षा अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे स्कूलों को Right to Education (RTE) Act से बाहर रखना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उद्देश्य के खिलाफ है।

मामला बड़ी पीठ को भेजा गया
सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना जरूरी है। हालांकि, फिलहाल अल्पसंख्यक स्कूलों को इस नियम से अस्थायी राहत मिली हुई है। अब यह पूरा मामला बड़ी पीठ के पास भेजा गया है।

दो जजों की पीठ ने पर्मति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट केस में दिए गए पुराने फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत बताई थी। उस फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई कानून से बाहर रखा गया था। अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के समक्ष जाएगा, जो बड़ी पीठ बनाकर सुनवाई करेंगे। यह याचिका डॉ. खेम सिंह भाटी द्वारा दाखिल की गई है।

आरटीई की मंशा पर सवाल

नई याचिका में कहा गया है कि पर्मति मामले में अदालत ने Right to Education Act की असली भावना को ठीक से नहीं समझा। आरटीई का उद्देश्य हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। यदि अल्पसंख्यक स्कूलों को इससे बाहर रखा जाता है, तो वहां पढ़ने वाले बच्चों के साथ अन्याय होता है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि सभी स्कूलों के बच्चों को प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों से पढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए, चाहे वे किसी भी संस्थान में पढ़ते हों।

टीईटी की अहमियत पर जोर
टीईटी परीक्षा को शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। इस टेस्ट से यह तय होता है कि शिक्षक न केवल प्रशिक्षित हैं, बल्कि वे बच्चों को प्रभावी तरीके से पढ़ाने की क्षमता भी रखते हैं।

यदि अल्पसंख्यक संस्थानों को इस परीक्षा से छूट दी जाती है, तो इससे शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है और असमानता बढ़ सकती है। इसलिए याचिकाकर्ता ने मांग की है कि टीईटी परीक्षा सभी स्कूलों में समान रूप से लागू की जाए।

संवैधानिक अधिकारों का संतुलन जरूरी
संविधान का अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने प्रबंधन का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 21A हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों संवैधानिक प्रावधानों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है ताकि न तो शिक्षा का अधिकार कमजोर पड़े और न ही अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो।अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ पर हैं, जिससे इस मामले पर एक दूरगामी और संतुलित फैसला आने की उम्मीद की जा रही है।

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