हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: संविदाकर्मी को हटाने पर रोक, यूपी सरकार से जवाब तलब

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: संविदाकर्मी को हटाने पर रोक, यूपी सरकार से जवाब तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की मातृ वंदना योजना में जिला कार्यक्रम सहायक और जिला कार्यक्रम समन्वयक के पदों पर संविदा पर कार्यरत दो कर्मचारियों को पद से हटाने पर रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की मातृ वंदना योजना में जिला कार्यक्रम सहायक और जिला कार्यक्रम समन्वयक के पदों पर संविदा पर कार्यरत दो कर्मचारियों को पद से हटाने पर रोक लगा दी है। दोनों कर्मचारी वर्तमान में फिरोजाबाद में कार्यरत हैं। कोर्ट ने कर्मचारियों को वेतन भुगतान जारी रखने और बकाया वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

अंबिका प्रसाद पांडे और एक अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति अजित कुमार ने याची के अधिवक्ता ओपीएस राठौर और अन्य को सुनकर यह आदेश दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि मातृ वंदना योजना पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित थी। जिसमें याची जिला कार्यक्रम सहायक और जिला कार्यक्रम समन्वयक के पदों पर संविदा पर नियुक्त हुए। बाद में इस योजना को बाल कल्याण और पुष्टाहार विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया। याचियों को भी बाल कल्याण विभाग में डेटा इंट्री ऑपरेटर और फाइनेंशियल लिट्रेसी स्पेशियलिस्ट के पदों पर संविदा पर ही समायोजित कर लिया गया।

31 जनवरी को निदेशक बाल कल्याण ने इन दोनों पदों पर आउट सोर्सिग से नियुक्ति करने का आदेश जारी किया और इसे जेम पोर्टल पर लिस्ट भी कर दिया गया। जबकि निदेशक ने ही 17 अक्टूबर 2023 के अपने आदेश में उपरोक्त दोनों पदों पर पहले से काम करते आ रहे संविदाकर्मियों को ही समाजोजित करने का आदेश दिया था।

प्रदेश सरकार का कहना था कि केंद्र सरकार ने योजना के संचालन हेतु नियुक्तियों का निर्देश दिया है। कोर्ट का कहना था कि केंद्र सरकार ने योजना सुचारू रूप से संचालित करने का निर्देश दिया है इसका अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारियों को बदला जाए। कोर्ट ने कर्मचारियों को पद से हटाने पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

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