छात्रों की उपस्थिति 75 फीसदी जरूरी, नहीं होगी तो परीक्षा कैंसिल कर दूंगी : राज्यपाल

छात्रों की उपस्थिति 75 फीसदी जरूरी, नहीं होगी तो परीक्षा कैंसिल कर दूंगी : राज्यपाल

बलिया। प्रदेश की राज्यपाल एवं जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों की उपस्थिति 75 फीसदी होनी चाहिए। यदि 75 फीसदी नहीं होगी तो परीक्षा कैंसिल कर दूंगी। मैं 10 किलोमीटर पैदल स्कूल जाती थी। उस समय जूते भी नहीं होते थे। सरदार वल्लभ भाई पटेल 40 किलोमीटर पैदल पढ़ने जाते थे। उनका एक ही लक्ष्य था कि वकील बनें और देश में अपना नाम करें। सभी विश्वविद्यालय में अच्छे और गलत काम की जानकारी टीवी, न्यूज़ पेपर, व्हाट्सएप के माध्यम से हमारे पास आती है। डिग्री डिजी लाॅकर में है, उसको डाउनलोड कर लें। समर्थ पोर्टल भी है। उसे देख लें नाम, पता, जन्मतिथि गलत हुआ तो पहले संशोधन कर लें। अन्यथा छात्र स्वयं जिम्मेदार होंगे।

राज्यपाल मंगलवार को विवि परिसर में आयोजित सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रोच्चार के साथ किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में भारत को अग्रणी बनाने के लिए युवाओं को नवाचार और अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। समारोह में विभिन्न संकायों के मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक और उपाधियां दी। राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन दिया है कि स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रोजेक्ट बनाएंगे तो जरूर सैंक्शन होगा। राज्य और केंद्र सरकार विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रकार की योजनाओं को लेकर आगे बढ़ रही है। ध्यान रखना चाहिए कि बजट में क्या-क्या मिल रहा है। उसका प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को भेजें। यदि आप 10 प्रोजेक्ट भेजते हैं तो उसमें एक-दो प्रोजेक्ट अवश्य ही स्वीकृत होंगे। पर्यावरण खतरे में है, इसे बचाने का संकल्प लेना होगा और अधिकाधिक संख्या में पौधे लगाने होंगे। विश्वविद्यालयों में अध्ययन-अध्यापन की संस्कृति में सुधार लाना होगा। छात्रों को नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहना होगा, अध्यापक पढ़ाने के साथ शोध की संस्कृति का विकास करें। उन्होंने कहा कि हमारी टीम हर विश्वविद्यालय में भ्रमण करती है। छात्रावास में भोजन की व्यवस्था की जांच करते हैं। रिपोर्ट हमें देते हैं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी भवन की स्थिति सही नहीं है। अकादमी भवन में सीलन है। गलतियों से अब तक हैंडओवर नहीं हुआ। मूल्यांकन भवन दो बड़े भवनों में चल रहा है। गर्ल्स हॉस्टल बी आवास के बगल में है जो जंगल झाड़ से पटा पड़ा है। सभी भवनों के आसपास सफाई नहीं है। भवन हैंडओवर नहीं होने का कारण बताना पड़ेगा।

नशे से रहिए दूर, लीव इन रिलेशनशिप से बचें

राज्यपाल ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, लीव इन रिलेशन जैसी दुष्प्रवृत्ति की आलोचना की। लड़कियों को सतर्क किया कि लुभावने झांसों में न आएं। अपने जीवन को बेहतर लक्ष्यों के लिए समर्पित करें। राज्यपाल ने कहा कि दो हॉस्टलों के बीच में जो खाली जगह होती है, उसमें शराब की बोतलें दिखाई देती हैं, ड्रग्स दिखाई देता है। यह बहुत ही गंभीर और चिंताजनक विषय है। केंद्र सरकार नशा मुक्ति आंदोलन चलती है, दूसरी तरफ युवा नशा करते हैं। हमारे युवा ड्रग्स छोड़ेंगे और शराब पीना बंद करेंगे, तभी हमें खुशियां मिलेंगी। उन्होंने लीव इन रिलेशनशिप पर गंभीर चिंता जताई। कहा कि 15 साल की बच्चियां अनाथ आश्रम में छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लिए मिल जाएंगी। यह लीव इन रिलेशन का गंभीर परिणाम है। बच्चियों को लोग फुसलाकर होटल में ले जाकर खाना खिलाते हैं। बच्चा पैदा करके घर से निकाल देते हैं। रिश्तेदार और परिवार के लोग भी बच्चियों को परेशान करते हैं। हमने बेटियों की पढ़ने की व्यवस्था कर दी है। ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है उनको समझाएं, अपनी जिंदगी खराब न करें। बाद में न तो मायकेवाले पूछेंगे और न ससुरालवाले। मन लगाकर पढ़ाई करें।

पूर्व कुलपति को किया याद

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि यह सातवां दीक्षांत है। इसमें उनकी उपस्थिति है। पहले दीक्षांत समारोह में आई थीं तो विश्वविद्यालय परिसर पानी से भरा हुआ था। तत्कालीन कुलपति कल्पलता पांडेय का परिश्रम है, जो विवि इस स्थिति में पहुंच गया है। उस समय रहने के लिए मकान भी नहीं था। दो-तीन अध्यापक ही विश्वविद्यालय परिसर में रहते थे। कल्पलता पांडेय ने प्रयास शुरू किया। आज लगता है कि विश्वविद्यालय संचालित हो रहा है।

कौशल विकास समय की मांग : पद्मश्री डॉ. रजनीकांत

मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने कहा कि बलिया की मिट्टी में तप, त्याग, तपस्या और क्रांति के तत्व समाहित हैं। महर्षि भृगु, बलि, पराशर, गर्ग, परशुराम जैसे ऋषियों की तपोभूमि होने के साथ यह धरती संतों एवं समाज सुधारकों की साधना स्थली रही है। प्रसन्नता व्यक्त की कि कृषि जैसे विषयों में भी छात्राओं को स्वर्ण पदक मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय सिर्फ ज्ञान अर्जन का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है और गुरु-शिष्य का संबंध आज भी उतना ही पवित्र है, जितना प्राचीन काल में था। उन्होंने कहा कि बिना नैतिक मूल्यों के शिक्षा अधूरी है। शिक्षा का उद्देश्य है व्यक्ति का सर्वांगीण विकास। वह ज्ञान, जो समाज और राष्ट्र के हित में न लगे, उसे सच्ची शिक्षा नहीं कहा जा सकता। युवाओं से आग्रह किया कि वे सत्य, सेवा और त्याग के मार्ग पर चलें। बलिया की विशेषताओं सत्तू, बाटी चोखा, जलेबी आदि की जीआई टैगिंग कराने का आश्वासन दिया।

दीक्षांत समारोह में 19,560 विद्यार्थियों को उपाधियां

बलिया। विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इस वर्ष कुल 19,560 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में 15,878 स्नातक और 3,682 परास्नातक विद्यार्थियों को उपाधिया दी गईं। इस वर्ष दीक्षांत समारोह में छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। उपाधि प्राप्त करने वालों में 62% छात्राएं (12,143) और मात्र 38% छात्र (7,417) रहे। स्नातक स्तर पर 60% छात्राएं तथा परास्नातक स्तर पर 72% छात्राएं सफल रहीं। इस बार कुल 19 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जिनमें 13 छात्र और 06 छात्राएं शामिल हैं।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विवि की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। बताया कि विवि के प्रथम चरणों के भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है। विश्वविद्यालय के प्रवेश, परीक्षा, परिणाम आदि सारे कार्य ऑनलाइन मोड में संचालित हैं। जेएनसीयू पूरे प्रदेश में सबसे पहले परीक्षा परिणाम घोषित करता है। परिसर में नये व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के खुलने से प्रवेश बढ़ा है। विवि के प्राध्यापकों को आईसीएसएसआर से प्रोजेक्ट के लिए अनुदान मिले हैं। आईसीएसएसआर एवं उप्र के विज्ञान एवं तकनीकी परिषद के अनुदान से सेमिनार और वर्कशाप आयोजित किए गए। पीएचडी उपाधियों की संख्या में वृद्धि हुई है। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, कुलसचिव संतलाल पाल, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह, सीडीओ ओजस्वी राज आदि रहे। संचालन डाॅ. सरिता पांडेय ने किया।

इन्हें मिले स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में कुल 43 विद्यार्थियों को 44 स्वर्ण पदक वितरित किए गए। इनमें बीए- नीलू यादव, बीकॉम- आंचल सिंह, बीएससी- सलोनी गुप्ता, बीसीए- श्रेया गौर, बीएससी कृषि- शाक्या, बीएड- नाजनीन बानो, बीपीएड- ओम प्रकाश भाम्भू, बीएलएड- फ़िज़ा नाज़, बीलिब- अमर बहादुर सिंह, एलएलबी- शहबाज़ खान, एमए- हिंदी – अस्मिता यादव, एमए- अंग्रेजी जान्हवी राय, एमए- संस्कृत- आरती साहनी, एमए- उर्दू- शामिया खातून, एमए- मनोविज्ञान- श्वेता, एमए- शिक्षाशास्त्र- कु. रीतू, एमए- प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व- प्रभा वर्मा, एमए- मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास- संजना, एमए- भूगोल- कु. शशि तिवारी, एमए- राजनीति विज्ञान- सरोज सुमन, एमए- अर्थशास्त्र- श्री कृष्ण यादव, एमए- दर्शनशास्त्र- प्रियंका यादव, एमए- रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन- संजीव कुमार यादव, एमए समाजशास्त्र- कु. सपना चौरसिया, एमएसडब्लू- खुशबू यादव, एमए गृहविज्ञान (मानव विकास)- कु. अंशिका यादव, एमए गृहविज्ञान (खाद्य एवं पोषण)- कु. कशक परवीन, एमए संगीत (गायन) – उन्नति चौरसिया, एमए संगीत(तबला)- सुडू चौहान, एमकॉम- आरती यादव, एमएड-कोमल कुमारी, एमएससी भौतिक विज्ञान- राजनारायण, एमएससी गणित- कृति गुप्ता, एमएससी रसायन विज्ञान- रूपेश कुमार पांडेय, एमएससी वनस्पति विज्ञान- प्रिया कुमारी, एमएससी जन्तु विज्ञान – कु. अंजलि, एमएससी- बायोटेक्नोलाॅजी- निशि खातून, एमएससी(कृषि) कृषि अर्थशास्त्र- शिवांगी सिंह, एमएससी(कृषि)- मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन- अनुष्का सिंह, एमएससी(कृषि)- आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन- आशुतोष पांडेय, एमएससी(कृषि)- हॉर्टिकल्चर- निधि गुप्ता, एमएससी(कृषि)- एग्रोनॉमी- आकृति सम्मिलित रहीं। शामिया खातून को विश्वविद्यालय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के लिए कुलाधिपति पदक (चांसलर मेडल) भी प्रदान किया गया।

प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थी हुए पुरस्कृत

दीक्षांत समारोह के पूर्व दीक्षोत्सव सप्ताह का आयोजन किया गया था। इसमें विश्वविद्यालय के गोद लिए हुए गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में भाषण, चित्रकला एवं कहानी लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया। तीन चरणों में आयोजित कराई गई इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों को पहले कक्षानुसार बांटकर प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसके बाद विद्यालय स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अंत में सभी गांवों के विजेता विद्यार्थियों के मध्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में चयनित विजेता विद्यार्थियों को राज्यपाल ने पुरस्कृत किया। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को राज्यपाल ने बच्चों के पढ़ने के लिए बालोपयोगी पुस्तकें भी भेंट कीं।

इस अवसर पर दीक्षांत की स्मारिका सृजन, विश्वविद्यालय के समाचार पत्र अन्वीक्षण के साथ प्राध्यापकों द्वारा लिखित पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। स्मारिका के संपादक मंडल में डाॅ. संदीप यादव, डाॅ. प्रवीण नाथ यादव, डाॅ. अभिषेक मिश्र, डाॅ. दिलीप कुमार मद्धेशिया एवं डाॅ. नीरज कुमार सिंह शामिल रहे। समाचार पत्र के संपादक डाॅ. प्रमोद शंकर पांडेय, संपादक मंडल के अन्य सदस्य डाॅ. सरिता पांडेय, डाॅ. दिलीप कुमार मद्धेशिया, डाॅ. नीरज कुमार सिंह, डाॅ. संदीप यादव, डाॅ. प्रवीण नाथ यादव, डाॅ. अभिषेक मिश्र रहे। पुस्तकों में डाॅ. अभिषेक मिश्र, बालमुकुन्द गुप्त का गद्य साहित्य, डाॅ. विवेक कुमार यादव का भारत में निर्बल वर्ग (समस्याएं और समाधान), डाॅ. रुबी की मातृत्व स्वास्थ्य एवं समाज कार्य, डाॅ. प्रज्ञा बौद्ध की द रोल ऑफ डिजिटल इकोनॉमी एंड टेक्नोलाजी इन इंडिया तथा डाॅ. अभय शंकर सिंह, डाॅ. श्याम बिहारी श्रीवास्तव व डाॅ. फिरोज खान द्वारा संपादित पुस्तक रुस-यूक्रेन संघर्ष और भारत का दृष्टिकोण शामिल है।

बालिकाओं का टीकाकरण

किशोरियों का टीकाकरण किया गया। बलिया जनपद के पुलिस परिवारों की 9-14 आयुवर्ग की 20 बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीका भी लगाया गया। राज्यपाल ने महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की प्रेरणा देते हुए बालिकाओं के टीकाकरण का आह्वान किया। कहा कि बालिकाओं को उपहार के रूप में अन्य वस्तुएं न देकर उनका 7 कराएं

गोशाला एवं उत्पादन विक्रेता केंद्र का उद्घाटन

बलिया। राज्यपाल ने मंगलवार को ग्राम मिरीगिरी बांसडीह स्थित जयप्रकाश पांडेय के बायो एनर्जी फार्मर कंपनी वासुदेव गोशाला एवं उत्पादन विक्रेता केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना करते हुए उन्हें ऑर्गेनिक (जैविक) खेती को अपनाने की अपील की। कहा कि आज की आवश्यकता है कि हम प्राकृतिक और टिकाऊ खेती की ओर लौटें। महिलाएं अब खेती में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। जिले के 100 से अधिक समाजशास्त्र समूह जिस तरह से काम कर रहे हैं, वह अत्यंत सराहनीय है। निर्देश दिए कि जिले में जितने भी किसान ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं, उनकी जियो टैगिंग कराई जाए ताकि उनके कार्यों को पहचान मिले और योजनाओं का लाभ भी सुगमता से पहुंचाया जा सके। किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल ने गोशाला की गीर गायों को देखा तथा उन्हें रोटी खिलाई। अरविंद सिंह ने मिलेट मडुवा का आटा, गुड्डू सिंह ने मोसंबी, नींबू भेंट किया।

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