बदले परीक्षा पैटर्न में उलझे शिक्षक, दशकों बाद खुद बने परीक्षार्थी

बदले परीक्षा पैटर्न में उलझे शिक्षक, दशकों बाद खुद बने परीक्षार्थी

प्रयागराज। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) रविवार को जिले के 49 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई। वर्षों से कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षक इस बार स्वयं परीक्षार्थी की भूमिका में नजर आए। बदले हुए परीक्षा पैटर्न ने कई शिक्षकों को असमंजस में डाल दिया।

उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में शामिल शिक्षकों को प्रश्नपत्र समझने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। परीक्षा समाप्त होने के बाद कई शिक्षकों ने बताया कि अवधारणा आधारित और गणित से जुड़े प्रश्न अपेक्षा से कहीं अधिक जटिल थे, जिसके कारण वे पूरा प्रश्नपत्र हल नहीं कर सके।

हालांकि सामान्य अभ्यर्थियों के लिए प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान बताया गया, लेकिन लंबे समय से अध्यापन कार्य से जुड़े शिक्षकों के लिए बदला हुआ पैटर्न चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। कई शिक्षकों का कहना था कि वे पढ़ाने में तो दक्ष हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रहे बदलावों के अनुरूप तैयारी का अवसर नहीं मिल पाता।

परीक्षा केंद्रों के बाहर शिक्षकों में इस बात को लेकर चर्चा रही कि योग्यता जांच के नाम पर अनुभव और सेवा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना था कि शिक्षक को बार-बार परीक्षा के कठघरे में खड़ा करना उसकी पेशेवर गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

फिलहाल परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई, लेकिन बदले पैटर्न और शिक्षकों की कठिनाइयों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

 

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