बड़ी खबर: नौ साल पहले बर्खास्त सात शिक्षक फिर किए गए बर्खास्त, फर्जी दस्तावेज़ मामला

 बड़ी खबर: नौ साल पहले बर्खास्त सात शिक्षक फिर किए गए बर्खास्त, फर्जी दस्तावेज़ मामला

जागरण संवाददाता, मैनपुरी : फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में वर्ष 2017 में बर्खास्त किए गए शिक्षकों को एक बार फिर से बर्खास्त कर दिया गया है। हाई कोर्ट के निर्देश पर दोबारा जांच कराई गई, जिसमें सभी आरोप सही पाए गए। बताया जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद फाइल लंबे समय तक विभाग में लंबित रही।

जानकारी के अनुसार, बर्खास्त किए गए शिक्षकों में छह की नियुक्ति वर्ष 2013 में और एक महिला शिक्षिका की नियुक्ति वर्ष 2014 में हुई थी।

📌 कैसे शुरू हुआ मामला?

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले 31 शिक्षकों के खिलाफ वर्ष 2017 में शिकायत दर्ज कराई गई थी। तत्कालीन बीएसए रामकरन यादव द्वारा जांच कराई गई, जिसके बाद सभी आरोपियों को बर्खास्त कर दिया गया।

कार्रवाई के बाद कई शिक्षक गायब हो गए। वहीं, बर्खास्त शिक्षकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जांच प्रक्रिया को गलत बताते हुए बर्खास्तगी को चुनौती दी। यह मामला कई वर्षों तक कोर्ट में चलता रहा।

⚖️ कोर्ट के आदेश के बाद फिर जांच

हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद वर्ष 2024 में सात शिक्षकों ने विशेष अपील दाखिल की। इस पर हाई कोर्ट ने मार्च 2025 में आदेश दिया कि इनकी टीईटी मार्कशीट की दोबारा जांच कराई जाए।

इसके बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज द्वारा जांच की गई, जिसमें मार्कशीट फर्जी पाई गई। परिषद ने अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंप दी।

📢 अंतिम कार्रवाई

कोर्ट के निर्देश पर बीएसए ने कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, लेकिन तीन नोटिस के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

बीएसए दीपिका गुप्ता के अनुसार, जिला चयन समिति को रिपोर्ट भेज दी गई है और सभी सात शिक्षकों को पुनः बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही, अब इनसे वेतन की रिकवरी (वसूली) की कार्रवाई भी की जाएगी।

यह मामला शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। लंबे समय तक चले इस केस में आखिरकार दोषियों पर अंतिम कार्रवाई कर दी गई है।

 

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