सरकारी स्कूलों में अब कोई बच्चा नहीं होगा ड्रॉपआउट, डिजिटल ट्रैकिंग से होगी निगरानी

सरकारी स्कूलों में अब कोई बच्चा नहीं होगा ड्रॉपआउट, डिजिटल ट्रैकिंग से होगी निगरानी

अलीगढ़। सरकारी विद्यालयों sarkaari vidyalaya में नए शैक्षिक सत्र से ड्रापआउट बच्चों पर निगरानी की डिजिटल व्यवस्था लागू होगी। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग shiksha vibhag ऐसी ट्रैकिंग प्रणाली का इस्तेमाल करेगा, जिसमें यदि कोई छात्र स्कूल School से लगातार अनुपस्थित रहेगा, तो अलर्ट Alert तुरंत प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और अधिकारियों को मिल जाएगा।इससे शिक्षक टीम अनुपस्थित बच्चे के घर पहुंच कर समय रहते समस्या का समाधान करेगी। ड्रापआउट draftout बच्चों की संख्या में गिरावट आएगी।

बच्चों के पढ़ाई बीच में छोड़ने यानी ड्रॉपआउट draftout की समस्या गंभीर रूप ले रही है। गरीब परिवार, आर्थिक तंगी, घर की जिम्मेदारियां और स्कूल में प्रेरणा की कमी बच्चों को शिक्षा shiksha से दूर कर रही हैं। सरकार Government अब डिजिटल ट्रैकिंग digital tracking और समय पर हस्तक्षेप के जरिए इस समस्या को रोकने और हर बच्चे को पढ़ाई study से जोड़े रखने की कोशिश कर रही है।

पायलट चरण के दौरान कुछ जनपदों में डिजिटल ट्रैकिंग digital tracking प्रणाली से बच्चों का ड्रापआउट draftout रोकने में काफी मदद मिली। ऐसे में इसे अब अलीगढ़ समेत पूरे प्रदेश Pradesh में लागू करने की तैयारी हो गई है।

सरकारी स्कूलों School में नए शैक्षिक सत्र के साथ ही बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग vibhag के स्कूलों school में यह प्रणाली हर छात्र की नियमित उपस्थिति पर नजर रखेगी और लगातार अनुपस्थित रहने पर तुरंत अलर्ट Alert भेजेगी। ट्रैकिंग सिस्टम से चिह्नित छात्रों के घर शिक्षकों Teacher’s की टीम जाएगी और अभिभावकों से संवाद कर उनके स्कूल School छोड़ने के कारणों की जांच करेगी।

यदि समस्या आर्थिक, सामाजिक या किसी अन्य वजह से उत्पन्न हुई है, तो शासन की विभिन्न योजनाओं Yojnaon के तहत सहायता प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य न केवल बच्चों को स्कूल School से जोड़ना है, बल्कि उन्हें शिक्षा shiksha के प्रति पुनः प्रेरित करना और पढ़ाई में निरंतरता सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रणाली न सिर्फ छात्रों की उपस्थिति बढ़ाएगी, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगी। डिजिटल अलर्ट से शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और समय रहते बच्चों को मार्गदर्शन एवं सहायता मिल सकेगी।

 

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