शिक्षकों को देना पडेगा TET का इम्तिहान, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का क्या होगा समाधान?? महाबहस का वीडियो देखें

शिक्षकों को देना पडेगा TET का इम्तिहान, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का क्या होगा समाधान?? महाबहस का वीडियो देखें

उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के करीब 1 लाख 86 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट के हालात बनते दिख रहे हैं। मुख्य कारण है टीईटी (Teacher Eligibility Test) परीक्षा को लेकर बनी स्थिति, जिसे लेकर शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से नॉन-टेट शिक्षकों को अब टीईटी परीक्षा देनी पड़ सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो शिक्षक पहले से ही कई प्रशासनिक जिम्मेदारियों—जैसे जनगणना और एसआईआर जैसे कार्यों—में लगे हैं, वे टेट की तैयारी कैसे करेंगे।

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टेट परीक्षा और उम्र को लेकर चिंता

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में कई शिक्षक ऐसे हैं जिनकी उम्र 48 से 55 वर्ष के बीच है। ऐसे में इतने वर्षों की सेवा के बाद टेट परीक्षा देना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

कई शिक्षकों का कहना है कि अगर वे टेट पास नहीं कर पाए तो उनकी नौकरी पर संकट आ सकता है। वहीं दूसरी तरफ पहले से टेट पास किए हुए हजारों अभ्यर्थी भी नौकरी की मांग कर रहे हैं।

शिक्षामित्र और अनुदेशकों को नियमित करने की मांग

शिक्षक संगठनों और कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में नॉन-टेट शिक्षक बाहर होते हैं तो शिक्षा विभाग में भारी पद खाली हो सकते हैं। ऐसे में सरकार के पास एक विकल्प यह भी है कि अनुभवी शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को नियमित किया जाए

प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षामित्र और अनुदेशक हैं जो वर्षों से कम मानदेय पर काम कर रहे हैं और उन्हें शिक्षा का अच्छा अनुभव भी है। कई संगठनों का कहना है कि सरकार चाहें तो इन्हें नियमित करके शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकती है।

4 साल बाद होने जा रही टेट परीक्षा

जानकारी के अनुसार, करीब चार साल बाद उत्तर प्रदेश में टेट परीक्षा आयोजित होने जा रही है। इससे पहले भी कई बार टेट परीक्षा को लेकर विवाद और देरी हो चुकी है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि टेट परीक्षा आवश्यक है, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शिक्षक भर्ती के लिए जरूरी योग्यता है। हालांकि, सवाल यह है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए क्या अलग व्यवस्था बनाई जाएगी।

62 वर्ष तक सेवा और 12 महीने मानदेय की मांग

शिक्षामित्र और अनुदेशक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें 62 वर्ष तक सेवा का अवसर और पूरे 12 महीने का मानदेय दिया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार उन्हें कुछ महीनों के लिए बेरोजगारी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।

सरकार से समाधान की उम्मीद

शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार अगर एक स्पष्ट नीति बना दे तो हजारों शिक्षकों की चिंता दूर हो सकती है। वहीं सरकार के स्तर पर भी इस मुद्दे पर नई व्यवस्था (मेकैनिज्म) तैयार करने की चर्चा चल रही है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार टेट परीक्षा, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के भविष्य को लेकर क्या फैसला लेती है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लाखों लोग इस निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

 

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