Retirement Planning: लाइफ साइकिल फंड से कर सकते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग, जानिए कैसे
रिटायरमेंट प्लानिंग जितनी आसान दिखती है, उतनी है नही। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टर को रिटायरमेंट की तरफ बढ़ने के साथ-साथ अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करते रहना पड़ता है। जब इनवेस्टर की उम्र कम होती है तो उसके पोर्टफोलियो में शेयरों की हिस्सेदारी ज्यादा होती है। उम्र बढ़ने के साथ पोर्टफोलियो में रिस्क-फ्री एसेट की हिस्सेदारी कम होती जाती है। पोर्टफोलियो में डेट जैसे एसेट की हिस्सेदारी बढ़ती जाती है। ऐसा फंड की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
म्यूचुअल फंड की नई कैटेगरी है लाइफ साइकिल फंड
कई लोगों के लिए पोर्टफोलियो में यह एडजस्टमेंट करना मुश्किल होता है। इस प्रॉब्लम का समाधान लाइफ साइकिल फंड्स हैं। यह म्यूचुअल फंड की नई कैटेगरी है, जिसे हाल में सेबी का एप्रूवल मिला है। लाइफ साइकिल फंड का मकसद लॉन्ग टर्म इनवेस्टिंग को आसान बनाना है। खासकर रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड तैयार करना इसका मकसद है।
शुरुआती सालों में फंड ज्यादा निवेश शेयरों में करता है, क्योंकि इनवेस्टर के पास निवेश के लिए लंबी अवधि होती है। इस वजह से उसके निवेश पर शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ता है। इससे लंबी अवधि में फंड की ग्रोथ की संभावना ज्यादा रहती है। लक्ष्य नजदीक आने पर शेयरों में निवेश घट जाता है। डेट में निवेश बढ़ जाता है। इससे फंड की सुरक्षा बढ़ जाती है।
5 से 30 साल तक होती है लाइफ साइकिल फंड की अवधि
सेबी के फ्रेमवर्क के तहत लाइफ साइकिल फंड की अवधि पांच से 30 साल तक होती है। यह फंड नए इनवेस्टर्स के लिए इसलिए सही क्योंकि उन्हें लगातार पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने की जरूरत नहीं पड़ती है। कई लोग शुरुआत में तो इक्विटी और डेट का मिक्स सही रखते हैं, लेकिन बाद में अपने ऐलोकेशन को एडजस्ट करना भूल जाते हैं। इससे उनके पोर्टफोलियो के लिए रिस्क बहुत बढ़ जाता है। खासकर तब उनकी रिटायरमेंट नजदीक होती है।
फंड के सेलेक्शन में बरतनी होगी सावधानी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप रिटायरमेंट के लिए लाइफ साइकिल फंड का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको सोचसमझकर सही अवधि वाले फंड का चुनाव करना होगा। उदाहरण के लिए अगर आपकी उम्र 30 प्लस है तो आपको लंबी अवधि वाले फंड का चुनाव करना होगा। अगर कोई इनवेस्टर रिटायरमेंट के करीब है तो उसे कम अवधि वाले फंड का चुनाव करना होगा।



