UP Education news : वर्षों से स्कूल न आने की शिकायत, फिर भी चलता रहा वेतन?
उन्नाव जिले के बांगरमऊ ब्लॉक से एक मामला सामने आया है, जिसने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत ततियापुर के प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक सहायक शिक्षिका पर आरोप है कि वह लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहीं, लेकिन इसके बावजूद उनका वेतन लगातार जारी रहा। UP Education news
ग्राम प्रधान की शिकायत, विभाग हरकत में | UP Education news
इस मामले को लेकर ग्राम प्रधान मनीराम यादव ने खंड शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह को लिखित शिकायत सौंपी है। प्रधान का कहना है कि शिक्षिका की अनुपस्थिति कोई नई बात नहीं है। यह स्थिति महीनों नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही बताई जा रही है। शिकायत मिलने के बाद विभागीय स्तर पर जांच का आश्वासन जरूर दिया गया है, लेकिन जवाब अभी बाकी है।
वेतन कैसे मिलता रहा?
सबसे बड़ा सवाल यहीं से शुरू होता है। अगर शिक्षिका नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रही थीं, तो फिर उनका वेतन किस आधार पर जारी होता रहा? क्या उपस्थिति रजिस्टर की सही तरीके से जांच हुई थी? यहीं से अधिकारियों की भूमिका भी चर्चा में आ जाती है। आमतौर पर स्कूलों का निरीक्षण और नियमित भ्रमण प्रशासनिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यह अनियमितता नजरों से कैसे बची, यह सवाल अब खुलकर पूछा जा रहा है।
ग्रामीणों की चिंता: बच्चों का भविष्य दांव पर
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने भी कई बार देखा है कि शिक्षिका महीनों तक स्कूल नहीं आईं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, लेकिन किसी ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार लोग आंखें मूंदे बैठे रहे और इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ा।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबकी नजरें जांच पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि शिकायत पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई होती है, जांच में क्या आधिकारिक तथ्य सामने आते हैं और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार ठहराया जाता है।
सरकारी स्कूलों से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक शिक्षिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।