मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) में आधार को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने संबंधी निर्वाचन आयोग का आदेश
🗳️ मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) में आधार को लेकर बड़ा अपडेट
भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान आधार कार्ड को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। यह निर्देश माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश (दिनांक 08.09.2025) के अनुपालन में जारी किया गया है।
🔍 क्या कहा गया है आदेश में?
▶️ आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, यह बात स्पष्ट रूप से दोहराई गई है।
▶️ लेकिन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4) के तहत आधार कार्ड को पहचान प्रमाण (Proof of Identity) के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
▶️ इसलिए बिहार राज्य में संशोधित मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए आधार कार्ड को पहचान के दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
📌 महत्वपूर्ण बिंदु
✔️ आधार कार्ड को इस प्रक्रिया में 12वें दस्तावेज़ के रूप में माना जाएगा।
✔️ निर्वाचन अधिकारी आधार की सत्यता और प्रामाणिकता की जांच कर सकते हैं।
✔️ आवश्यकता पड़ने पर अन्य सहायक दस्तावेज़ भी मांगे जा सकते हैं।
✔️ निर्वाचन आयोग को इस संबंध में तत्काल दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
आधार पहचान के लिए मान्य है
लेकिन नागरिकता सिद्ध करने के लिए नहीं
मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए सत्यापन आवश्यक रहेगा
यह निर्णय उन लाखों लोगों के लिए राहत है जिनके पास आधार कार्ड उपलब्ध है और वे मतदाता सूची में अपने नाम से संबंधित संशोधन कराना चाहते हैं। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
👉 मतदाता जागरूकता के लिए यह जानकारी साझा करें।
